National Food Security Nutrition Mission 2026: किसानों की आय और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने की बड़ी पहल

National Food Security Nutrition Mission: भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां की ज्यादातर आबादी खेती पर निर्भर करती है और देश में अनाज और दाल और मोटा अनाज की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। इन सभी बात को ध्यान रखते हुए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा पोषण मिशन के द्वारा अगले 5 वर्षों तक इस योजना को जारी रखने का फैसला किया गया है। इस मिशन के तहत धान और गेहूं और दाल और मोटा अनाज को पोषण से जुड़ी फसलों से उत्पाद को बढ़ाया जाएगा।

National Food Security Nutrition Mission योजना के लिए सरकार के द्वारा 3285.49 करोड रुपए की मंजूरी दी गई है और देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत करना ही किसान की आय बढ़ाने का प्रमुख जरिया है।

National Food Security Nutrition Mission क्या है?

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा पोषण मिशन एक सरकारी योजना है और इस योजना का प्रमुख लक्ष्य देश के फसलों की उत्पादन को बढ़ावा देना है। यह योजना खासकर उन राज्यों में लागू किया गया है, जहां पर उत्पादन कम होती है और संभावना ज्यादा है।

इस योजना के तहत किसानों को निम्न प्रकार की सहायता दिया जा सकता है?

बेहतर और प्रमाणित बीज दिया जाएगा।
आधुनिक खेती का उपकरण दिया जाने वाला है।
सिंचाई सुविधा में सुधार किया जाने वाला है।
मिट्टी की जांच की जाएगी और उर्वरक की जानकारी दी जाएगी।
खेती से जुड़ी ट्रेनिंग ही दिया जाएगा जिससे किसान मॉडर्न जमाने की तकनीक अपना पाएंगे।

National Food Security Nutrition Mission में मिशन को 5 वर्षों तक क्यों बढ़ाया गया है?

भारत में बहुत तेजी से आबादी बढ़ती जा रही है और इसी वजह से अनाज की मांग बढ़ती जा रही है और जलवायु परिवर्तन के कारण फसल का उत्पादन में बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ रहा है। इन सभी समस्याओं को देखते हुए सरकार ने इस मिशन को 5 वर्षों तक रखने का निर्णय लिया।

निम्न फायदे क्या होंगे?

अनाज और दालों का उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।
किसानों को नई तकनीक मिलेगी।
इनकम में बढ़ोतरी होने वाली है।
देश में खाद्य संकट की संभावना कम होती चली जाएगी।

किस फसलों पर दिया जाएगा विशेष ध्यान?

इस योजना के तहत मुख्य रूप से निम्न प्रकार के फसलों पर ध्यान दिया जाएगा।

धान पर ध्यान दिया जाएगा और गेहूं पर ध्यान दिया जाएगा और दाल पर ध्यान दिया जाएगा और चना पर ध्यान दिया जाएगा और अरहर पर ध्यान दिया जाएगा और उड़द दाल पर ध्यान दिया जाएगा और मूंग पर ध्यान दिया जाएगा और मोटा अनाज पर ध्यान दिया जाएगा और बाजार और ज्वार पर विशेष तौर पर ध्यान दिया जाएगा।
यह सभी पोषण तत्वों से भरपूर हैं और कम पानी में भी उग जाते हैं।

योजना का बजट और खर्च?

इस योजना के माध्यम से 3285.49 करोड़ की राशि मंजूर की गई है और किसने की सहायता के लिए सीधे लाभ प्राप्त होगा तो और भी जानकारी प्राप्त करते हैं।

बीज वितरण के रूप में अनुमानित 900 करोड रुपए खर्च किए जाने वाले हैं।
कृषि उपकरण सहायता के लिए 750 करोड रूपए पैसे खर्च किए जाएंगे।
प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम के लिए 500 करोड रुपए खर्च किए जाएंगे।
अन्य प्रशासनिक खर्च के रूप में 485.49 करोड रुपए खर्च किया जाएगा।
सिंचाई सुधार के लिए 650 करोड़ खर्च किया जाएगा।
कुल बजट 3285.49 करोड रुपए है।

किसानों को क्या लाभ मिलेगा और क्यों राज्यों में बढ़ावा दिया जा रहा है?

बेहतर बीज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार खेती से जुड़ी नई तकनीक सीखने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाएगी।
उत्पादन में बढ़ोतरी होगी और नई तकनीक से फसल और भी ज्यादा उगेगी।
इनकम में बढ़ोतरी होगी और किसान की कमाई भी बढ़ेगी।
राज्यों की भूमिका बहुत ज्यादा होने वाली है और मोटा अनाज पर विशेष तौर पर फोकस किया जा रहा है।
मोटा अनाज जैसे बाजरा ज्वार पर विशेष तौर पर ध्यान रखा जा रहा है।
कम पानी में उगने वाले हैं।
पोषण से भरपूर होते हैं।
जल्दी तैयार हो जाते हैं।
सुख और गर्मी का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता है।

National Food Security Nutrition Mission के लिए जरूरी दस्तावेज?

आधार कार्ड होना चाहिए।
जमीन के कागज होने चाहिए।
बैंक खाता पासबुक होना चाहिए।
मोबाइल नंबर होना जरूरी है।

महत्वपूर्ण लिंक

नीचे कुछ जरूरी वेबसाइट दी गई हैं जहां से किसान अधिक जानकारी ले सकते हैं:

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
https://agricoop.gov.in

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन की जानकारी
https://nfsm.gov.in

किसान पोर्टल
https://farmer.gov.in

पीएम किसान योजना
https://pmkisan.gov.in

National Food Security Nutrition Mission से पर्यावरण पर सकारात्मक असर?

इस मिशन के तहत उत्पादन बढ़ेगा और पर्यावरण को भी सुरक्षा मिलेगी।

कम पानी वाली फसल बढ़ेगी।
मिट्टी की सेहत में सुधार होगा।
रासायनिक खाद का कम उपयोग होगा।
जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा।
पांच वर्षों में इस योजना के माध्यम से अनाज में काफी बढ़ावा होगा।

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