National Mission on Natural Farming: प्राकृतिक खेती से पाए सरकार से लाभ

National Mission on Natural Farming: जैसे कि आप सभी को मालूम है, भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां की ज्यादातर आबादी खेती पर निर्भर करती है और पिछले कई सालों में खेती में रासायनिक खाद का और कीटनाशकों का प्रयोग लगातार बढ़ता जा रहा है और इससे जमीन की उर्वरक लगातार कम होती जा रही है और किसने की लागत भी बढ़ गई है और इसी समस्या को देखते हुए किसानों की इनकम को बढ़ाने के बारे में सरकार सो रही है और इसीलिए National Mission on Natural Farming योजना को निकाला गया है और इस योजना के माध्यम से पांच वर्षों में 1101 करोड रुपए का निवेश करने का निर्णय लिया गया है तो अगर आप इस योजना के बारे में और भी जानकारी चाहते हैं तो आर्टिकल को अंतिम तक पढ़े तभी आपको अच्छे तरीके से जानकारी समझ में आने वाली है।

National Mission on Natural Farming में प्राकृतिक खेती क्या होती है?

प्राकृतिक खेती एक ऐसी पद्धति खेती होती है जो रासायनिक खाद का और कीटनाशकों का और महंगे उर्वरकों का उपयोग बिलकुल भी नहीं किया जाना चाहिए और इसको नेचुरल तरीके से यानी गोबर से और गोमूत्र से और जैविक खाद्य का उपयोग करके फसल उगाई जानी चाहिए।

इससे मिट्टी की गुणवत्ता बहुत ही अच्छी हो जाती है और फसल की सुरक्षित रहता है और प्राकृतिक खेती में जमीन की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है।

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन का उद्देश्य क्या है?

इस योजना को शुरू करने के पीछे सरकार का बहुत सारे महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं।

किसने की खेती की लागत इस योजना के माध्यम से कम करना है।
मिट्टी की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।
रासायनिक खाद्य के उपयोग को कम करना है।
किसानों की इनकम को ज्यादा करना है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य को सुरक्षित करना है और सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक किस प्राकृतिक खेती को अपनाए।

National Mission on Natural Farming के मुख्य लाभ क्या है?

मिशन के मुख्य लाभ राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन से किसानों को नई फायदे मिलने वाले हैं।
मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और प्राकृतिक खाद से मिट्टी को पोषण तत्व मिलेगा और जमीन लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहेगी।
स्वास्थ्य के लिए बेहतर फसल होने वाली है और रासायनिक दावों को बिना उगाई गई फसल और अधिक सुरक्षित और स्वास्थ्य के लिए अच्छी होने वाली है।
रासायनिक खाद्य के बिना उगाई गई फसल अधिक सुरक्षित और स्वास्थ्य के लिए बहुत ही अच्छी होती है।
पर्यावरण की सुरक्षा भी होने वाली है और प्राकृतिक खेती से पानी और मिट्टी और हवा प्रदूषण नहीं होगा।
किसने की इनकम में बढ़ोतरी भी होने वाली है क्योंकि प्राकृतिक तरीके से खेती करना बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।

योजना के तहत सरकार की पहल?

किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाने वाला है और खास तौर पर बिना पैसे लिए दिए जाने वाला।
खेती के लिए ज़रूरी सामग्री उपलब्ध कराई जाने वाली है।
गांव में प्रशिक्षण केंद्र बनाए जाएंगे।
प्राकृतिक खेती के मॉडल फॉर्म तैयार किए जाने वाले हैं।
किसानों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जाने वाले है।

National Mission on Natural Farming में प्राकृतिक खेती कैसे की जाती है?

प्राकृतिक खेती के कुछ आसान तरीके होते हैं और किसान अपना कर अच्छी फसल उगा सकता है।
गोबर का इस्तेमाल किया जाए और गोमूत्र का इस्तेमाल किया जाए तो यह मिट्टी को पोषण तत्व देने में मदद करती है।
बीज बोने के पहले प्राकृतिक घोल से उपचारित किया जाना चाहिए ताकि बीमारी से बचाया जा सके।
फसल के आसपास सूखी घास का और पत्तियों का उपयोग किया जाना चाहिए ताकि बीमारी से बचाया जा सके।
एक ही खेत में अलग-अलग फसल उगाने से जमीन की उर्वरता बनी रहती है।

महत्वपूर्ण लिंक

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
https://agricoop.nic.in

प्राकृतिक खेती से जुड़ी जानकारी
https://naturalfarming.dac.gov.in

प्रधानमंत्री कृषि योजनाएं
https://pmkisan.gov.in

निष्कर्ष

गोबर और गोमूत्र से तैयार किया गया खाद्य पोषण तत्व देने में मदद मिलती है और मिश्रित खेती भी करना चाहिए और ज्यादातर खाद्य का उपयोग नहीं करना चाहिए नहीं तो खेती अच्छे से नहीं होगी और इसके बारे में आपको ज्यादा जानकारी विस्तार पूर्वक बता दिया गया है और अगर आप भी एक किसान है और अच्छी खेती करना चाहते हैं तो बिना खाद वाली खेती करें जो शरीर को भी नुकसान नहीं करेगा और आपके परिवार के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होने वाला है।

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